जिस देश को 700 साल मुगलों और 200 साल अंग्रजो की गुलामी से मुक्त कराने में महात्मा गांधी,नेहरू,सरदार पटेल ,सुभाषचंद्र बोस,और भगतसिंग जैसे सेनानियों के अथक प्रयासो से खण्ड खण्ड भारत को अहिंसा के हथियार से आधुनिक हथियारों से लैस लुटेरों के चंगुल से बिना खून बहाये आजाद कराया ,और नेहरू के प्रयासों से हिन्दू राजशाही के आदी देश को यूरोप की आधुनिक लोकतांत्रिक प्रणाली से शासन करने की पध्दति को अपना कर विश्वपटल पर देश की उपस्थिति का जो प्रयास किया उसे आज के सत्ताधीश ध्वस्त करने का प्रयास कर रहे हैं ।। राजनीति जो सेवा का क्षेत्र कहलाता है वो व्यापार होता जा रहा है ,जो एक बार चुन कर सत्ता का स्वाद चख लेता है उसकी ये विरासत बन जाती है ,उसका पूरा परिवार इस सत्ता सुख को भोगने के लिए किसी भी प्रकार के आचरण करने में झिझकता नही है ।एक किस्म की पुरानी राजशाही की छाप राजनेतावों में परिलिक्षित होने लगी है ।विरोध के स्वर को दबाने के लिए सुचारू प्रशासन के लिए निमित संस्थावों का उपयोग किया जाने लगा है ।देश की 48%गरीब और निरीह जनता को फ्री राशन बाँट कर एक नया लाभार्थी वर्ग बना दिया गया है जो इनको सत्ता में बिठाने का स्थायी जरिया बन गया है ।। देश के बेरोजगार नवजवानों को रोजगार उपलब्धता की जगह मंदिर ,मस्ज़िद,हिन्दू,मुसलमान के झगड़ो में उलझा दिया है । चूंकि इनके पास कोई विज़न नहीं है कोई योजना नहीं देश को गरीबी ,बेरोजगारी से निजाद दिलाने के लिए सिर्फ स्वंय के सत्ता सुख के अलावा ,देश की हालत श्रीलंका और बेनेजुवेला जैसी होती जा रही है।और तो ओर देश की सेना की ,रेलवे की भर्ती पिछले दो साल से रुकी है जवान बच्चों की उम्र निकलती जा रही है ,चाइना और रूस यूक्रेन जैसे देशों में सेना में भर्ती के लिए जवान मिल नहीं रहे इन्हें आफ़ग़ानिस्तान जैसे देशों से जवानों को लेना पड़ रहा है ।और हमारे यहां भर्ती के लिए होड़ लगी है ।नेहरू ने जो उधोग लोगो को रोजगार देने के लिए सरकारी क्षेत्र में लगए थे जो सिर्फ रोजगार देने के लिए न कि मुनाफा कमाने के लिए उन्हें बेचा जा रहा है ।नवरत्नों को कोयले के भाव मे अपने करीबी उधोगपतियों को बेचा जा रहा है ,जो विरोध करता है उस पर ED और CBI का छापा डलवाया जा रहा है ।। इसका एक मात्र उद्देश्य OBC ST/SC का आरक्षण खत्म करना है किसी भी सरकार को तीन (स) शिक्षा,सुरक्षा, स्वास्थ्य पर ज्यादा खर्च करना चाहिए ये सरकार इन्ही क्षेत्रो में उदासीन है इसमें दो क्षेत्रों का बजट विश्व के किसी भी विकाशशील देशों से बहुत कम है ।जो सरकार अपने देश के नागरिकों को अच्छी शिक्षा अच्छा सवास्थ्य नही दे सकती उसे सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं ।। जिस देश मे चार चार मौसम, उपजाऊ कृषि भूमि अथाह खनिज भंडार अनगिनत नदियां हों उस देश मे गरीबी देख कर देश के सत्ताधारियों की काबलियत पर सवाल उठना लाजमी है ।शिक्षा ओर स्वास्थ्य क्षेत्र का बजट घटाया जा रहा है प्राइवेट सेक्टर को बढ़ाया जा रहा है इस सेक्टर पर राजनेतावों और नॉकरशाहों का आधिपत्य है। महंगी शिक्षा और महंगा इलाज गरीबों के लिए अभिशाप बन गया है।। खनिज संपदा में विकीवीडिया के सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक इस देश मे 2012 के आंकलन के अनुसार अभ्र्क़ का विश्व का सबसे बड़ा भंडार है ,आयरन और का तीसरा boxide का पांचवां और थोरियम का सबसे बड़ा भंडार है ।इन खनिजो का दोहन करके ओर परिष्कृत करके विश्व बाजार में बेच कर देश मे बहने वाली नदियों को जोड़ कर नहरों का जाल बिछा कर ओर विधुत उत्पादन किया जाए तो कारखानों को प्रचुर मात्रा में बिजली और कृषि को जल की सुगम उपलब्धता से देश के युवाओं को रोजगार और किसान को खेती से भरपूर रोजगार प्राप्त हो सकता है ।परंतु दुर्भाग्य से जमीनों पर राजनीतिक सरंक्षण प्राप्त भूमाफियों का कब्जा है ,शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी राजनेतावों का कब्जा है खनिज पर बड़े बड़े उधोगपतियों का जो किसी न किसी राजनीतिक पार्टियों से जुड़े हुए उनका कब्जा है अर्थात लोकतंत्र पर राजशाही काबिज हो गई आजादी के पहले की 630 रियासतें फिर से दूसरे रूप में जिंदा हो गई ।अधिकांश सांसद, विधायक ,बड़े नॉकरशाह पूरी व्यवस्था पर काबिज हो गए महसूस होता है, देश के DNA में ही राजशाही है।लोकतांत्रिक व्यवस्था के नाम पर देश की जनता के साथ छलावा हो रहा है ।ये लोकतांत्रिक प्रणाली उन्ही देशो में सफल हुई है जहां शिक्षा का स्तर शत प्रतिशत है।अशिक्षित देशों में लोकतंत्र शोषण का माध्यम बन गया है ।बिना शिक्षा और स्वास्थ पर खर्च को बढ़ाये लोकतंत्री प्रणाली सफल होगी इसमे संसय है ।एक इंटरव्यू में ब्लिट्ज के संपादक करंजिया से कहा था अगर इंग्लैंड को देखे तो वह औपचारिक रूप से चर्च ऑफ इंग्लैंड से एफफिलिअटेड ,लेकिन वहां का समाज लोकतांत्रिक हैं ।दूसरी तरफ हम संवैधानिक रूप से लोकतांत्रिक हैं लेकिन हमारा समाज लोकतांत्रिक नहीं है ।हमारे देश की राजशाही व्यवस्था हिन्दू है, इसलिए हमें सक्रिय व सचेत रूप से समाज को लोकतांत्रिक बनाने की कोशिश करनी होगी ।इसीलिए राजमाता सिंधिया ने कहा था कि हमारी तपों भूमि लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुकूल नहीं थी।इसके बावजुद नेहरूजी ने इस देश मे लोकतांत्रिक व्यवस्था का पौधा लगाया ।
शुक्रवार, 10 जून 2022
बुधवार, 4 मई 2022
पेट्रोलियम लाबी
विश्व के अर्थ तन्त्र की तीसरी लाबी पेट्रोलियम पदार्थ याने क्रूड ऑयल के उत्पादकों की है ।इस तेल के स्त्रोत मुख्यतया अरब,गल्फ देशों में है प्रकृति ने यही एक मुख्य खनिज इन देशों को बहुतायत में दे रखा है ।चूंकि इन देशों में लोकतंत्र नही के बराबर है इनके शासक मुगलकालीन खलिफावों के पास है,और इनके पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वो इस खनिज को एक्स्प्लोर करके रिफाइन करके मार्केटिंग कर सके ,इसलिए इस कार्य को अमरीका के यहूदी पूंजीपतियों ने अपनी रिफाइनरी डाल कर इन देशों के नवाबों को खनिज तेल का मूल्य देकर रिफाइन तेल उधोग पर कब्जा कर लिया ।और OPEC जैसी संस्था बना कर इसके भाव ,सप्लाई,और उत्पादन पर एकाधिकार स्थापित कर लिया ।चूंकि विश्व के एक छोटे से भाग में ही इसकी उपलब्धता है और मांग ज्यादा है ,साथ मे इसके व्यापार की ट्रेडिंग करने के लिए अमेरिकन करेंसी की बाध्यता लगा रखी है ।इसलिए इस व्यापार पर भी अमेरिकन पूंजीपतियों का कब्जा है ।सिर्फ रूस एक मात्र देश है जहां इसका भंडार बहुतायत में है,जो विश्व की जरूरतों का 30%पूरा कर सकता है इनकी रिफाईनरी पर यहूदियों का स्वामित्व नहीं है, इस देश को साम्यवादी बता कर उसे नीचा दिखाने का प्रयास किया जाता रहा है ।। इस प्रकार इन तीनो लॉबियों (फार्मा, हथियार, आयल) के द्वारा विश्व पर राज करने के लिए समय समय पर इनका उपयोग डर का माहौल पैदा करके किया जाता रहा है चूकि ये इतने साधन संपन्न हो चुके हैं कि आने वाले भविष्य का निर्धारण भी इन्ही के हाथों में रहेगा ।ये चाहें तो विश्व मे लोकतांत्रिक व्यवस्था लाएं या तानाशाही इनके चंगुल से निकलना असम्भव सा लगता है ।विज्ञान का उपयोग जन सुविधावों की जगह विनाश के लिए किया जा रहा है ।इस भौतिकवाद ने सामाजिक ताना बाना ध्वस्त कर दिया ,मानवता खत्म हो रही है ।परिवार टूट रहे हैं लोगों का ध्यान पूँजीनिर्माण और सुरक्षित जीवन की और ज्यादा हो गया है ।जब परिवार टूटेगा जो राज्य,देशऔर विश्व की धुरी कहलाती है जब वोही टूट जाएगी तो इस विश्व का क्या होगा ? समाप्त
हथियार लाबी
कोरोना वायरस की महामारी से पूरी दुनिया निजात पाने ही वाली थी कि रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया ।रूस ने अपने पुराने हो चुके जंक खाते हथियारों का जखीरा खत्म करने के लिए तथा नए हथियारों के प्रदर्शन से दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमरीका को चुनोती देते हुए ,किसी समय USSR का हिस्सा रहा यूक्रेन जिसने नाटो की सदस्यता के लिए आवेदन किया था को सबक सिखाने के लिए आधुनिक हथियारों से हमला करके ये जितलाने का प्रयास किया कि हमारी बिल्ली हमी से म्याऊं ।की कहावत को चरितार्थ करते हुए इस देश की जनता को पलायन करने को मजबूर कर दिया।और दुनिया को दिखा दिया कि हम उन हथियारों के निर्माता हैं जिनकी तोड़ किसी के पास नही ।। विचारणीय प्रश्न ये है कि ये परमाणु सम्पन्न देश उन्ही देशो पर हमला क्यो करते है जिनके पास एटमी हथियार नहीं हैं ये भी सोची समझी रणनीति है ।ये उन्ही देशों पर अपने हथियारों का प्रदर्शन करते हैं जो क्या तो गरीब हैं या विकासशील देश है ।ये देश इन सम्पन्न देशो के हथियारों की प्रयोगशाला बन गई हैं ।जैसे इराक,अफगानिस्तान,और अब यूक्रेन ।इन देशों के शासकों ने इन सम्पन्न देशों की शर्तों को मानने से इनकार कर दिया तो इन शासको सत्ताच्युत करने के लिए निरीह जनता पर प्रहार करके डर का माहौल पैदा कर दिया ।ताकि बाकी देश अपनी सुरक्षा मजबूत करने के लिए इन हथियार निर्माता देशों से हथियार खरीदें ।UNO जिसकी स्थापना इन गरीब देशों को न्याय दिलाने या सहायता के उधेश्य से की थी वो भी तमाशबीन बना देख रहा है याने इस पर भी इन्ही निर्मातावो का कब्जा है ।जिस तरह WHO फार्मा लॉबी के प्रभाव में है उसी प्रकार UNO भी हथियार लाबी के प्रभाव में है ।इस का अर्थ ये निकलता क्या तो हर देश परमाणु सम्पन्न बने या वो तमाम देश जो गरीब है विकासशील हैं उन्हें अपना अलग से संगठन बनाना चाहिए ताकि ऐसी परिस्थिति में एक जुट होकर उस आक्रमणकारियों का मुकाबला कर सके और उस देश का बहिष्कार करें ।नहीँ तो ये देश आधुनिक टेक्नोलॉजी के नाम पर नए हथियारों के नाम पर धन उगाहते रहेंगे और गरीब बने रहेंगे ।संगठन और संख्या में बहुत ताकत होती है उसका प्रदर्शन और उपस्थिति दर्ज कराए बिना ये हमले और शोषण इस हथियारलाबी का होता रहेगा ---क्रमशः--पेट्रोलियम लाबी
3 लॉबियों की ग्रिफ्त में दुनिया 1 फार्मा लाबी
1) फार्मा लॉबी :--फरवरी2020 में विश्व मे फार्मा लॉबी ने कोरोना वायरस फैला कर एक नई महामारी को ईजाद करके विश्व मे हड़कम्प मचा दिया । करोड़ों लोग इस बीमारी की ग्रिफ्त में आये, करोड़ो लोग मर भी गए ।लेकिन इस कि दवाई आज तक ईजाद नही हो पाई।इस बीमारी की दहशत ने लोगों को घरों में कैद कर दिया ।शहरों में लोकडाउन कर दिया गया ।जिनके पास जो भी जमा पूंजी थी उन्होंने इस बीमारी से बचने के लिए खर्च कर दी न पूंजी बची न मरीज ।इस वायरस ने पहले बूढ़ों को और बाद में जवानों को और अब बच्चों को ग्रिफ्त में लेने की who द्वारा सूचित किया गया । इसके बचाव के लिए मास्क ,पीपी किट,सैनिटाइजर का उपयोग जरूरी करके इस उधोग को जो मरणासन्न पड़ा था उसको अम्रत पिला दिया ।इस बीमारी ने वो अस्पताल जो बन्द होने की कगार पर थे उन्हें हाई टेक बना दिया ।एक साल क़े बाद इस वायरस की वेक्सीन ईजाद की गई उसे जरूरी बता कर करोड़ो का धन कमाया गया ।अर्थात फार्मा लॉबी ने वायरस का डर फैला कर पूरी दुनिया के अर्थ तन्त्र को बर्बाद कर दिया और खुद दशाब्दियों के लिए आबाद हो गया ।फार्मा क्षेत्र को छोड़कर बाकी सभी उद्योग दिवालियापन की हद तक पहुंच गए ।इस बीमारी से मरने वालों का तो आंकड़ा सरकारों के पास है ।लेकिन भुख और दिवालिया होने के डर से आत्महत्या करनेवालों का आंकड़ा इनके पास नही है।जिसका असर दो साल बाद अब दिखने लगा है ।इससे साबित होता है कि इन आंकड़ों की बाजीगिरी से जनता में भय का वातावरण निर्मित होगा जिससे लोग डॉक्टरों और अस्पतालो में जाएंगे और इनका व्यापार और बढ़ेगा।जिस तरह डर का दूसरा नाम भगवान है उसी तरह डॉक्टर का दूसरा नाम भगवान (डर) बन गया ।इन तमाम अंतरराष्ट्रीय फार्मा कंपनियों के मालिक बहुतायत में अमेरिकन (यहूदी व्यापारी)हैं और चीन में इनका उत्पादन होता है ।इन दोनों ने मिलकर इस वायरस को विश्व मे फैलाया और विश्व पर शासन करने का प्रयास किया ।वो तो अच्छा हुवा भारत के लोगों का भौगोलिक स्थिति प्राकृतिक मौसम और भारतीय खान पान की वजह से यहां के लोगों का इम्यून सिस्टम मजबूत था नही तो इस वायरस से करोड़ो जाने जाती ।सरकारों को चाहिए इस प्रकार की लाबी का भंडाफोड़ किया जाए ओर जन हित मे कार्य करने के लिए इन पर दबाव बनाया जाए ।ताकि भविष्य में कोई संस्था इस प्रकार का कुकृत्य करने के पहले सोचने को मजबूर किया जाए ।इसमे UNO को हस्तक्षेप करके WHO का पुनर्गठन किया जाए का प्रस्ताव सभी सदस्य को देना चाहिए ।----अगली कड़ी --हथियार लाबी --
बुधवार, 26 जनवरी 2022
देश को सम्पन्न बनाने की परिकल्पना
भारत जैसे बहुभाषी ,बहुध्रुवीय और विभिन्न भौगोलिक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस देश मे सम्पन्नता की परिभाषा में एक रूपता नहीं पाई जाती । परन्तु अंतरराष्ट्रीय मापदण्डो को देखते हुए हम सम्पन्न राष्ट्र बनने की सम्भावनावों को तलाशने में चूक कर रहे हैं।जबकि हमारे पास सम्पन्न बनने के लिए भरपूर मात्रा में खेती लायक जमीन,भरपूर मात्रा में खनिज,प्रकाशऔर जल उपलब्ध है ।यह देश सदियों से कृषि प्रधान रहा है ,80% जनता कृषि पर आश्रित है,किसी भी कृषि प्रधान देश को सम्पन्न बनाने के लिए उस के लोगो की आकांक्षाओं को जाग्रत करने होगा ,उसे खेत से बाहर की दुनिया के विषय मे जाग्रत करना होगा ।वर्तमान जीवन यापन के अतिरिक्त भी एक सुनेहरी दुनिया के विषय मे बताना होगा ।जब उनकी आकांक्षा जागेगी तो वह उसी खेती से अतिरिक्त धन उपार्जन करने का प्रयास करेगा ।उसके द्वारा की जाने वाली खेती के तरीकों में बदलाव लाना होगा ,उत्पादन की मात्रा और क़्वालिटी को सुधारने के लिए बदलाव करने की सोच पैदा करनी होगी।इसमे सहकारिता से खेती भी एक सार्थक उपाय हो सकता जिनके पास कम जोत की खेती है ।इस अतिरिक्त प्रयास से उपार्जित धन से उसके पास अतिरिक्त पूंजी का संचय होगा और इसी संचित पूंजी से सम्पन्नता की राह निकलेगी ।। खनिज संपदा :------ दूसरा क्षेत्र किसी भी देश की खनिज सम्पदा उस देश की सम्पन्नता का दूसरा भागीदार होता है ।इस देश मे सभी प्रकार की खनिज सम्पदा भरपूर मात्रा में जमीन के नीचे दबी पड़ी है ,इसके दोहन के लिए धन और श्रम की जरूरत होती है जो इस देश मे प्रचुर मात्रा में है इस देश के मंदिरों के पास ही इतना धन है जितना दुनिया सबसे सम्पन्न राष्ट्र के पास भी नही होगा ।यदि इस धन का उपयोग इस खनिज के दोहन ओर उत्पादन के लिए कारखाने लगाने में किया जाए ,बशर्ते योजनाकार ईमानदार हो,तो पूंजी और श्रम की कमी नही आएगी।जिस क्षेत्र में जिस खनिज की उपलब्धता और उपयुक्तमात्रा हो उसका उत्पादन हेतु कारखानों का निर्माण भी उसी क्षेत्र में करना होगा ।आज टेक्नोलॉजी आसानी जे उपलब्ध है इसलिए उसके उपयोग से छोटे बड़े उधोग स्थापित किये जा सकते हैं ,उन कारखानो में युवा ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध होगा जो कृषि की आमदनी के अतिरिक्त धन की आवक से परिवार में सम्पन्नता आएगी।अभी इन खनिजो का उपयोग उन क्षेत्रों में नही होता जहां से इसे निकाला जाता है ,इसके लिए स्थानीय सरकारों को निर्णय लेना होगा कि जो खनिज जहां उपलब्ध है उसका करखाना उसी क्षेत्र में लगे।जिससे क्षेत्रवार खेती और खनिज से उस क्षेत्र में सम्पन्नता आएगी। जल सम्पदा:------ भारत के कई राज्य जल की उपलब्धता में सम्पन्न हैं और कुछ राज्य जल विहीन है ,जलसम्पन्न राज्यों में बिजली का उत्पादन करके प्रदेश को सम्पन्न बनाया जा सकता है ,उत्पादित सरपल्स विधुत को पड़ोसी राज्यों कोबेच कर।इस उधोग में भी रोजगार उतपन्न होगा ।। सौरऊर्जा:------राजस्थान जैसे राज्य में 52'से55' तक तापमान जाता है मरुस्थली क्षेत्र है वहां पर सोलर प्लांट लगा कर विद्युत उत्पादन करके पड़ोसी राज्यों को बिजली बेचा जा सकता है।थार मरुस्थल में कैरेन इंडिया कंपनी ने तेल के 180 कुवोंकी खोज की थी ,जिनमे अथाह क्रूड ऑयल पाया गया उसके दोहन से आयात घटा कर विदेशी पूंजी बचाई जा सकती है तथा देश की जरूरत भी किसी हद तक पूरी की जा सकती है ।कई गल्फ राष्ट्र तो केवल इस तेल के भंडार के दम पर विश्व के संपन्न राष्ट्रों में गिने जातेहैं ।। विन्डस एनेर्जी:------भारत दो महासागर और एक सागर के निकट स्थित है यदि इन समुद्रों के किनारों पर विन्डस एनर्जी का उत्पादन किया जाए तो यह राष्ट्र विद्युतक्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकता है।डेनमार्क जेसै छोटे देश समुद्र के अंदर मिलों तक पोल गड़ा कर विन्डस एनर्जी का उत्पादन कर सकता है तो हम क्योंनहीं? देश के राजनेतावों और नॉकरशाहों में इच्छा शक्ति की जरूरत है राष्ट्रीयभावना जगाने की जरूरत है ।जब दुनिया की टॉप12 कंपनियों में सीईओ भारतीय हो सकते हैं इनकी बुद्धि का उपयोग हम क्यों नहीं कर सकते? यदि उपरोक्त बिन्दुवों पर गंभीरता से अमल किया जाए तो कोई ताकत हमे सम्पन्न राष्ट्र की श्रेणी में आने से रोक नही सकती।जब देश की जनता सम्पन्न होगी तो राष्ट्र सम्पन्न होगा देश के लोग खुशहाल होंगे तो बुद्धि का पलायन रुकेगा देश की पूंजी देश मे रहेगी तो नए नए विकास के पायदान भी खलेंगे।
शुक्रवार, 10 दिसंबर 2021
तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जा
तालिबान का अफगानिस्तान की चुनी हुई सरकार पर बंदूक की नोक पर कब्जा कर लिया मजबूरन राष्ट्रपति को देश छोड़ कर भागना पड़ा ।विश्व की एक मात्र शक्ति का 20 साल की लड़ाई के बाद उसके आधुनिक हथियारों को छोड़ कर पलायन ,औरतों पर कातिलाना हमला इस्लाम के नाम पर शरिया कानून का अपनी सुविधानुसार थोपने का प्रयास कुरान की आयतों का अपनी सुविधानुसार अनुपालन करवाने की जबर्दस्ती ,इस वैज्ञानिक युग मे आदिम युग का आगाह प्रदर्शित करती है ।। अफगानिस्तान के इतिहास की तरफ यदि गौर किया जाए तो ऐसा लगता है कि ये अशिक्षित लोगो के कबीलों का देश है ,जिन कबीलों में प्रकृति ने असीम प्राकृतिक संपदा खनिज के रूप में भंडारित है लेकिन यहां के वाशिंदे इसका दोहन कर के सम्पन्नता प्राप्त करने के बजाय ताकत के दम पर इस्लाम के नाम पर इस्लामिक राज्य स्थापित करना चाहते हैं। जो आधुनिक युग की जीवन प्रणाली से मेल नहीं कहता ,इनके जुझारूपन,निडरता,ने विश्व की 3 महाशक्तियों को अपने ऊपर राज करने से रोका ।वो चाहे ब्रिटेन हो ,रुस हो या अमेरिका हो ।कोई भी महाशक्ति इन पर शासन नही कर सकी।गजनी जैसे छोटे से गांव से निकला वहां का खानाबदोश ,गुंडा भारत के सोमनाथ मंदिर को लूट लेता है ,खिलजी,दुर्रानी जैसे लूटेरे भारत पर हमला कर के इसकी संपत्ति लूट कर अफगानिस्तान ले जाते हैं ,उसके बाद भी वहां की जनता को शिक्षित करने का प्रयास नहीं करते । इस तालिबानी कब्जे की घटना को देख कर नेस्तरोडेम की भविष्यवाणी जो तीसरे विश्वयुद्ध के विषय मे आज से 500 साल पहले की थी ,सच साबित होती दिख रही है ।ऐसा लगता है कि ये भविष्वाणी अफगानिस्तान की भूमि पर फ़लीभूत होगी।क्योंकि चीन ,रसिया ,ईरान ने तालिबान को आंशिक मान्यता दे दी है ।दूसरी तरफ अमेरिका ,यूरोपियन देश इसका विरोध कर रहे हैं ।यदि युद्ध हुवा तो एक तरफ अफगानिस्तान के लड़ाके इसी देश की जमीन ,चीन की सेना रसिया के हथियार और ईरान का धन बाकी देशों की सेना से मुकाबला करेगी ।नेस्तरोडेम ने लिखा है कि हरे झंडे के नीचे लाल सेना उस देश की सेना पर हमला करेगी जिनका शुभ दिन रविवार है यानी ईसाई देशों पर इस्लाम के झंडे के नीचे चीन की सेना हमला करेगी ।और इस युद्ध मे भारी जन धन की हानि होगी और लंबे समय तक चलेगा ।और इस युद्ध की तबाही को रोकने के लिए वह देश जो दो महासागर और एक सागर के निकट बसा हुवा है जिसका शुभ दिन गुरुवार है ,बीच बचाव करके युद्ध समाप्त कराएगा ।और विश्व गुरु बन कर दुनिया मे अपनी अलग छवि बनायेगा। इस भविष्यवाणी को देखते हुए मुझे भारत ही वह देश समझ मे आता है जो दुनिया को नेतृत्व प्रदान करेगा
बुधवार, 5 मई 2021
कोरोना वायरस का विश्व के आर्थिक जगत पर प्रभाव 5/4/2020
विश्व पटल पर सार्वभौमिक सत्ता धारी ,सर्वशक्तिमान राष्ट्र का तमगा विलुप्त हो गया ।आज किसी भी राष्ट्र को विश्व का शक्तिशाली देश कहलाने का हक नही रहा ।अमरीका जैसा देश जो दुनिया का सबसे शक्तिशाली ,विकसित विश्व के अर्थ तंत्र की कुंजी जिसके पास होती थी ,चाहे जब किसी भी द्वीप के किसी भी राष्ट्र पर अपनी धौंस जमा देता था ।वह भी इस वायरस के आगे नतमस्तक हो कर हर मान गया ।सारी वैज्ञानिक तकनीक सारी औद्योगिक संपन्नता सारी आर्थिक शक्ति धूमिल हो गई । विश्व पटल पर चीन जैसे राष्ट्र आज विश्व पटल पर आर्थिक,औद्योगिक शक्ति के रूप में उभर कर आया है ।सैन्य शक्ति के रूप में भी उभर कर आया है ।यूरोप और अमेरिका की 129 कंपनियों का मालिक बन गया ।इस वायरस को पहले विश्व मे फैलाया ,महामारी का नाम देकर प्रचार किया ,शेयर मार्केट में भूचाल लाया ,और गिरते हुए शेयर मार्केट से उन कंपनियों के के शेयर खरीदे जिन्होंने इस देश मे निवेश कर रखा था ।अब ये कंपनियां कभी भी चीन से अपना उत्पादन बन्द नही कर पाएंगी ।500 globle rich कंपनियों में से 129 कंपनियों पर चीन का कब्जा हो गया ।जबकि 2008 तक मात्र 8 कंपनियां पर चीन का कब्जा था ।आज अमरीका की 122 कंपनियों पर मालिकाना हक है ।अर्थात आज अमरीका को सैन्य बल ,हथियार बल के आधार पर विश्व का शक्तिशाली देश कहलाने का हक खत्म हो गया ।परमाणु सम्पन्न राष्ट्र भी इस बीमारी से जूझने में सक्षम नही रह गए ।शक्तिशाली राष्ट्र की परिभाषा बदल गई ।दुनिया नये दौर की और जा रही है ।बायोलॉजिकल वॉर की शुरुआत चीन ने कर दी एक वायरस फेलावो ,लाखों लोगों की जान कुछ घण्टो में ले लो।न मिसाइल ,न टैंक न बम न परमाणु ताकत ,एक ऐसा हथियार जिसका विकल्प ढूंढने में सालों लगते हों उसका इस्तेमाल करो और उससे बचने के उपयोगी सामग्री का निर्माण करो निर्यात करो और धन कमावो ।। आर्थिक संपन्नता की हौड़ ने मानवता को शर्मशार कर दिया ।इतनी बड़ी महामारी पूरे विश्व मे फैली हुई है कि सभी देश बचाव की मुद्रा में आ गए ।जहां से फैली उसके विरुद्ध कोई आवाज उठाने वाला भी नही बचा ।उल्टे बीमारी फैलाने वाले से सहायता की मांग हो रही है ।राष्ट्रसंघ, क्या कर रहा है ,WHO, WTO जैसी संस्था मौन हैं सम्पन्न देश आर्थिक रूप से धराशायी हो रहे हैं ।और एक देश जिसने बीमारी फैलाई वो सम्पन्न हो रहा है ।क्या विडम्बना है कोई आवाज भी नही उठा रहा ।सब आत्म रक्षा में लगे हैं ।