बुधवार, 26 जनवरी 2022

देश को सम्पन्न बनाने की परिकल्पना

 भारत जैसे बहुभाषी ,बहुध्रुवीय और विभिन्न भौगोलिक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस देश मे सम्पन्नता की परिभाषा में एक रूपता नहीं पाई जाती । परन्तु अंतरराष्ट्रीय मापदण्डो को देखते हुए हम सम्पन्न राष्ट्र बनने की सम्भावनावों को तलाशने में चूक कर रहे हैं।जबकि हमारे पास सम्पन्न बनने के लिए भरपूर मात्रा में खेती लायक जमीन,भरपूर मात्रा में खनिज,प्रकाशऔर जल उपलब्ध है ।यह देश सदियों से कृषि प्रधान रहा है ,80% जनता कृषि पर आश्रित है,किसी भी कृषि प्रधान देश को सम्पन्न बनाने के लिए उस के लोगो की आकांक्षाओं को जाग्रत करने होगा ,उसे खेत से बाहर की दुनिया के विषय मे जाग्रत करना होगा ।वर्तमान जीवन यापन के अतिरिक्त भी एक सुनेहरी दुनिया के विषय मे बताना होगा ।जब उनकी आकांक्षा जागेगी तो वह उसी खेती से अतिरिक्त धन उपार्जन करने का प्रयास करेगा ।उसके द्वारा की जाने वाली खेती के तरीकों में बदलाव लाना होगा ,उत्पादन की मात्रा और क़्वालिटी को सुधारने के लिए बदलाव करने की सोच पैदा करनी होगी।इसमे सहकारिता से खेती भी एक सार्थक उपाय हो सकता जिनके पास कम जोत की खेती है ।इस अतिरिक्त प्रयास से उपार्जित धन से उसके पास अतिरिक्त पूंजी का संचय होगा और इसी संचित पूंजी से सम्पन्नता की राह निकलेगी ।।                    खनिज संपदा :------                                                                        दूसरा क्षेत्र किसी भी देश की खनिज सम्पदा उस देश की सम्पन्नता का दूसरा भागीदार होता है ।इस देश मे सभी प्रकार की खनिज सम्पदा भरपूर मात्रा में जमीन के नीचे दबी पड़ी है ,इसके दोहन के लिए धन और श्रम की जरूरत होती है जो इस देश मे प्रचुर मात्रा में है इस देश के मंदिरों के पास ही इतना धन है जितना दुनिया सबसे सम्पन्न राष्ट्र के पास भी नही होगा ।यदि इस धन का उपयोग इस खनिज के दोहन ओर उत्पादन के लिए कारखाने लगाने में किया जाए ,बशर्ते योजनाकार ईमानदार हो,तो पूंजी और श्रम की कमी नही आएगी।जिस क्षेत्र में जिस खनिज की उपलब्धता और उपयुक्तमात्रा हो उसका उत्पादन हेतु कारखानों का निर्माण भी उसी क्षेत्र में करना होगा ।आज टेक्नोलॉजी आसानी जे उपलब्ध है इसलिए उसके उपयोग से छोटे बड़े उधोग स्थापित किये जा सकते हैं ,उन कारखानो में युवा ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध होगा जो कृषि  की आमदनी के अतिरिक्त धन की आवक से परिवार में सम्पन्नता आएगी।अभी इन खनिजो का उपयोग उन क्षेत्रों में नही होता जहां से इसे निकाला जाता है ,इसके लिए स्थानीय सरकारों को निर्णय लेना होगा कि जो खनिज जहां उपलब्ध है उसका करखाना उसी क्षेत्र में लगे।जिससे क्षेत्रवार खेती और खनिज से उस क्षेत्र में सम्पन्नता आएगी।                     जल सम्पदा:------                                                                           भारत के कई राज्य जल की उपलब्धता में सम्पन्न हैं और कुछ राज्य जल विहीन है ,जलसम्पन्न राज्यों में बिजली का उत्पादन करके  प्रदेश को सम्पन्न बनाया जा सकता है ,उत्पादित  सरपल्स विधुत को पड़ोसी राज्यों कोबेच कर।इस उधोग में भी रोजगार उतपन्न होगा ।।                                                            सौरऊर्जा:------राजस्थान जैसे राज्य में 52'से55' तक तापमान जाता है मरुस्थली क्षेत्र है वहां पर सोलर प्लांट लगा कर विद्युत उत्पादन करके पड़ोसी राज्यों को बिजली बेचा जा सकता है।थार मरुस्थल में कैरेन इंडिया कंपनी ने तेल के 180 कुवोंकी खोज की थी ,जिनमे अथाह क्रूड ऑयल पाया गया उसके दोहन से आयात घटा कर विदेशी पूंजी बचाई जा सकती है तथा देश की जरूरत भी किसी हद तक पूरी की जा सकती है ।कई गल्फ राष्ट्र तो केवल इस तेल के भंडार के दम पर विश्व के संपन्न राष्ट्रों में गिने जातेहैं ।।                                                                           विन्डस एनेर्जी:------भारत दो महासागर और एक सागर के निकट स्थित है यदि इन समुद्रों के किनारों पर विन्डस एनर्जी का उत्पादन किया जाए तो यह राष्ट्र विद्युतक्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकता  है।डेनमार्क जेसै छोटे देश समुद्र के अंदर मिलों तक पोल गड़ा कर विन्डस एनर्जी का उत्पादन कर सकता है तो हम क्योंनहीं? देश के राजनेतावों  और नॉकरशाहों में इच्छा शक्ति की जरूरत है राष्ट्रीयभावना जगाने की जरूरत है ।जब दुनिया की टॉप12 कंपनियों में सीईओ भारतीय हो सकते हैं इनकी बुद्धि का उपयोग हम क्यों नहीं कर सकते?                                                यदि उपरोक्त बिन्दुवों पर गंभीरता से अमल किया जाए तो कोई ताकत हमे सम्पन्न राष्ट्र की श्रेणी में आने से रोक नही सकती।जब देश की जनता सम्पन्न होगी तो राष्ट्र सम्पन्न होगा देश के लोग खुशहाल होंगे तो बुद्धि का पलायन रुकेगा देश की पूंजी देश मे रहेगी तो नए नए विकास के पायदान भी खलेंगे। 

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