जिस देश को 700 साल मुगलों और 200 साल अंग्रजो की गुलामी से मुक्त कराने में महात्मा गांधी,नेहरू,सरदार पटेल ,सुभाषचंद्र बोस,और भगतसिंग जैसे सेनानियों के अथक प्रयासो से खण्ड खण्ड भारत को अहिंसा के हथियार से आधुनिक हथियारों से लैस लुटेरों के चंगुल से बिना खून बहाये आजाद कराया ,और नेहरू के प्रयासों से हिन्दू राजशाही के आदी देश को यूरोप की आधुनिक लोकतांत्रिक प्रणाली से शासन करने की पध्दति को अपना कर विश्वपटल पर देश की उपस्थिति का जो प्रयास किया उसे आज के सत्ताधीश ध्वस्त करने का प्रयास कर रहे हैं ।। राजनीति जो सेवा का क्षेत्र कहलाता है वो व्यापार होता जा रहा है ,जो एक बार चुन कर सत्ता का स्वाद चख लेता है उसकी ये विरासत बन जाती है ,उसका पूरा परिवार इस सत्ता सुख को भोगने के लिए किसी भी प्रकार के आचरण करने में झिझकता नही है ।एक किस्म की पुरानी राजशाही की छाप राजनेतावों में परिलिक्षित होने लगी है ।विरोध के स्वर को दबाने के लिए सुचारू प्रशासन के लिए निमित संस्थावों का उपयोग किया जाने लगा है ।देश की 48%गरीब और निरीह जनता को फ्री राशन बाँट कर एक नया लाभार्थी वर्ग बना दिया गया है जो इनको सत्ता में बिठाने का स्थायी जरिया बन गया है ।। देश के बेरोजगार नवजवानों को रोजगार उपलब्धता की जगह मंदिर ,मस्ज़िद,हिन्दू,मुसलमान के झगड़ो में उलझा दिया है । चूंकि इनके पास कोई विज़न नहीं है कोई योजना नहीं देश को गरीबी ,बेरोजगारी से निजाद दिलाने के लिए सिर्फ स्वंय के सत्ता सुख के अलावा ,देश की हालत श्रीलंका और बेनेजुवेला जैसी होती जा रही है।और तो ओर देश की सेना की ,रेलवे की भर्ती पिछले दो साल से रुकी है जवान बच्चों की उम्र निकलती जा रही है ,चाइना और रूस यूक्रेन जैसे देशों में सेना में भर्ती के लिए जवान मिल नहीं रहे इन्हें आफ़ग़ानिस्तान जैसे देशों से जवानों को लेना पड़ रहा है ।और हमारे यहां भर्ती के लिए होड़ लगी है ।नेहरू ने जो उधोग लोगो को रोजगार देने के लिए सरकारी क्षेत्र में लगए थे जो सिर्फ रोजगार देने के लिए न कि मुनाफा कमाने के लिए उन्हें बेचा जा रहा है ।नवरत्नों को कोयले के भाव मे अपने करीबी उधोगपतियों को बेचा जा रहा है ,जो विरोध करता है उस पर ED और CBI का छापा डलवाया जा रहा है ।। इसका एक मात्र उद्देश्य OBC ST/SC का आरक्षण खत्म करना है किसी भी सरकार को तीन (स) शिक्षा,सुरक्षा, स्वास्थ्य पर ज्यादा खर्च करना चाहिए ये सरकार इन्ही क्षेत्रो में उदासीन है इसमें दो क्षेत्रों का बजट विश्व के किसी भी विकाशशील देशों से बहुत कम है ।जो सरकार अपने देश के नागरिकों को अच्छी शिक्षा अच्छा सवास्थ्य नही दे सकती उसे सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं ।। जिस देश मे चार चार मौसम, उपजाऊ कृषि भूमि अथाह खनिज भंडार अनगिनत नदियां हों उस देश मे गरीबी देख कर देश के सत्ताधारियों की काबलियत पर सवाल उठना लाजमी है ।शिक्षा ओर स्वास्थ्य क्षेत्र का बजट घटाया जा रहा है प्राइवेट सेक्टर को बढ़ाया जा रहा है इस सेक्टर पर राजनेतावों और नॉकरशाहों का आधिपत्य है। महंगी शिक्षा और महंगा इलाज गरीबों के लिए अभिशाप बन गया है।। खनिज संपदा में विकीवीडिया के सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक इस देश मे 2012 के आंकलन के अनुसार अभ्र्क़ का विश्व का सबसे बड़ा भंडार है ,आयरन और का तीसरा boxide का पांचवां और थोरियम का सबसे बड़ा भंडार है ।इन खनिजो का दोहन करके ओर परिष्कृत करके विश्व बाजार में बेच कर देश मे बहने वाली नदियों को जोड़ कर नहरों का जाल बिछा कर ओर विधुत उत्पादन किया जाए तो कारखानों को प्रचुर मात्रा में बिजली और कृषि को जल की सुगम उपलब्धता से देश के युवाओं को रोजगार और किसान को खेती से भरपूर रोजगार प्राप्त हो सकता है ।परंतु दुर्भाग्य से जमीनों पर राजनीतिक सरंक्षण प्राप्त भूमाफियों का कब्जा है ,शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी राजनेतावों का कब्जा है खनिज पर बड़े बड़े उधोगपतियों का जो किसी न किसी राजनीतिक पार्टियों से जुड़े हुए उनका कब्जा है अर्थात लोकतंत्र पर राजशाही काबिज हो गई आजादी के पहले की 630 रियासतें फिर से दूसरे रूप में जिंदा हो गई ।अधिकांश सांसद, विधायक ,बड़े नॉकरशाह पूरी व्यवस्था पर काबिज हो गए महसूस होता है, देश के DNA में ही राजशाही है।लोकतांत्रिक व्यवस्था के नाम पर देश की जनता के साथ छलावा हो रहा है ।ये लोकतांत्रिक प्रणाली उन्ही देशो में सफल हुई है जहां शिक्षा का स्तर शत प्रतिशत है।अशिक्षित देशों में लोकतंत्र शोषण का माध्यम बन गया है ।बिना शिक्षा और स्वास्थ पर खर्च को बढ़ाये लोकतंत्री प्रणाली सफल होगी इसमे संसय है ।एक इंटरव्यू में ब्लिट्ज के संपादक करंजिया से कहा था अगर इंग्लैंड को देखे तो वह औपचारिक रूप से चर्च ऑफ इंग्लैंड से एफफिलिअटेड ,लेकिन वहां का समाज लोकतांत्रिक हैं ।दूसरी तरफ हम संवैधानिक रूप से लोकतांत्रिक हैं लेकिन हमारा समाज लोकतांत्रिक नहीं है ।हमारे देश की राजशाही व्यवस्था हिन्दू है, इसलिए हमें सक्रिय व सचेत रूप से समाज को लोकतांत्रिक बनाने की कोशिश करनी होगी ।इसीलिए राजमाता सिंधिया ने कहा था कि हमारी तपों भूमि लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुकूल नहीं थी।इसके बावजुद नेहरूजी ने इस देश मे लोकतांत्रिक व्यवस्था का पौधा लगाया ।
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