सोमवार, 18 जुलाई 2022

एक और क्रांति की ज़रूरत

 इस देश में मुख्यतः तीन क्रांतियां हुई है , जिनका आधार जनता के बीच दबा हुआ गुस्सा था।  गुस्सा उनके साथ हो रहे अत्याचार जो कुछ दीखता था और कुछ छुपा हुआ था।  विद्रोह छुपे हुए अत्याचार के कारण किसी एक व्यक्ति के अनुभव एवम उसकी सहनशक्ति की सीमा को लांघने के कारण हुआ।  पहेली क्रांति १८५७ में सापेक्ष अत्याचार की अपेक्छा एक बोने से अत्याचार [बन्दूक की गोली में गाय के मांस का उपयोग] के कारण प्रशासन से विद्रोह के रूप में मंगल पांडेय ने शुरू की थी।  जो देश के कोने-२ में फैल गयी , यदि यह व्यवस्थित तरीके से संचालित होती तो देश १८५७ में ही आज़ाद हो जाता।  परन्तु यह शासन की भागेदारी से वंचित और उपेक्छित वर्ग के द्वारा संचालित थी और उपेक्षित शासको का स्वार्थ निहित था ,जिसके कारण यह क्रान्ति सफल नहीं हो पायी। 

दूसरी क्रान्ति १९४२ में गांधीजी के कारण शुरू हुई , पचासी साल के लम्बे अंतराल के बाद साऊथ अफ्रीका में उनके साथ अंगेजो द्वारा किये गए अपमान से उत्पन्न गुस्से के कारण बदले की भावना से इस क्रान्ति का उदय हुआ।   किसी हद्द तक यह क्रांति सफलतम की श्रेणी में गिनी जाएगी।  क्योकि इसमें निजी स्वार्थ निहित नहीं था , यह व्यवस्थित भी थी क्योकि जन समुदाय एक व्यक्ति के पीछे था , और आक्रोश का प्रदर्शन कुछ अन्य हाथो में था।  इनके मिलेजुले प्रभाव से क्रान्ति सफल रही, परन्तु निष्कंटक प्रशासन और भौतिक सुख ने इस प्रतिवर्तन को  तानाशाही प्रवर्ति का रुप दे दीया। सामूहिक नेतृत्व एकल में केंद्रित हो गया , जो धीरे-२ जनता से संवादहीनता में परिवर्तित होता गया और तानाशाही की और अग्रसर होने लगा , जिसका परिणाम ३२ साल बाद १९७४ में श्री जयप्रकाश नारायण की सम्पूर्ण क्रान्ति के रूप में प्रकट हुई। यह तीसरी क्रांति हुई।   

चूकि यह क्रान्ति एकल तानाशाही के विरुद्ध एक व्यक्ति द्वारा लड़ी गयी थी तथा इसमें दबंगो और छात्रों का साथ लिया  गया था , और सदियों से उपेक्छित वर्ग की भागेदारी ज्यादा थी , तथा परिवर्तन  के बाद सत्ता भी इन्ही के हाथो में आनी थी , इस लिए इस उपेक्छित वर्ग के सत्ता में आने के बाद जयप्रकाश जी द्वारा अपेक्छित क्रांति उनके जाने के बाद नेतृत्वहीन हो गयी , इस कारण जनहित, "समाजवाद" के नाम से सत्ता हासिल करके कुछ राज्यों में परिवारवाद में परिवर्तित हो गयी। 

अब चौथी क्रांति की जरुरत है।  समीक्षा की जाए तो दूसरी क्रान्ति  अधिक समय तक टिकाऊ रही क्योकि इसमें उद्देश्य शुद्ध एवम व्यापक था।  पहेली क्रांति ३ साल में बुझ गयी , दूसरी क्रांति ३२ साल तक जिन्दा रही , तीसरी ७ साल में भुजने लगी।  अब चौथी उम्मीद करता हूँ की युवाओं द्वारा आएगी जो HIGH-TECH होनी चाहिए।  यह व्यवस्था परिवर्तन की होनी चाहिए,  क्योकि शिक्षा का स्तर बढ़ा है , अपेक्षाएं बढ़ी है , सहनशक्ति शिक्षित वर्ग में कम होती है , अन्याय का प्रतिकार जल्द उपजता है , संभव है जल्द ही SILENT क्रांति होनी चाहिए जो BALLOT से ही आएगी।  इसमें दबंगो और तथाकथित "परिवारों" से निजाद मिलेगी। 

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