शनिवार, 27 अगस्त 2022

तीसरे विश्व युद्ध की और यूरोप

 दुनियां की दो बड़ी शक्तियां अपने आप को  सुपर पावर बताने की होड़ में दुनिया को युद्ध जैसी विभीषका में झोंकने की और प्रयास रत्त हैं ।कोरोना की महामारी से उबर नहीं पाये थे और अब रूस यूक्रेन युद्ध पिछले 6 माह से चल रहा है जिसमे यूक्रेन को मोहरा बना कर अमरीका और रूस अपने हथियारों के प्रदर्शन की होड़ में लगे हैं ।दूसरी तरफ चाइना ,ताइवान को कब्जाने तयारी में लगा है ।ये सारी शक्तियां उस देश पर हमला नहीं करती जो परमाणु सम्पन्न है ।ये सब सोची समझी रन नीति के तहत ये चाल चलते हैं इससे निरीह जनता गरीबी और असमंजस की जिंदगी जीने को मजबूर हॉती। है इस प्रकार के संकट के हल के लिए UNO  निरीह बना तमाशा देख रहा है ये संस्था भी इन सुपर पावर देशों के प्रभाव में कोई निर्णय नही लेता तब इसका औचित्य क्या है ।मानवता और सम्मान पूर्वक जीवन जीने का अधिकार देने वाला समाज मूक दर्शज बना देख रहा है ।ऊपर से प्राकृतिक आपदा से दुनिया के संपन्न देश ग्रषित है इंसान का जीवन आर्थिक रुप से  टूट गया है उसकी भरपाई के लायक सरकारों के पास साधन नही बचे ।इसे प्रकृति का आक्रोश या प्रलय नहीं तो क्या कहेंगे ।विश्व बिरदारी के पुराधावों को एक आपातकाल मीटिंग बुला कर विश्व शांति का प्रयास करना चाहिए।दुनिया के पूंजीपतियों को विचार करना चाहिये जब मानवता ही नही बचेगी तो इस संचित  पूंजी का क्या उपयोग ।वक्त का तगादा है विश्व की महा शक्तियॉ के बीच सुलह कराई जाए और दोषी राष्ट्र पर बंदीश लगाई जाए या उसे UNO ,WTO से बाहर किया जाए ।तथा उसके प्राक्रतिक संसाधनों  के दोहन पर प्रतिबंध लगा कर मानव हित मे अंतरराष्ट्रीय संस्था के नेतृव में उत्पादन और वितरण की व्यवस्था की जाए अन्यथा विश्व एक विश्व व्यापी संकट के चक्र में फंसता जाएगा  

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