बुधवार, 4 मई 2022

हथियार लाबी

 कोरोना वायरस की महामारी से पूरी दुनिया निजात पाने ही वाली थी कि रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया ।रूस ने अपने पुराने हो चुके जंक खाते हथियारों का जखीरा खत्म करने के लिए तथा नए हथियारों के प्रदर्शन से दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमरीका को चुनोती देते हुए ,किसी समय USSR का हिस्सा रहा यूक्रेन जिसने नाटो की सदस्यता के लिए आवेदन किया था को सबक सिखाने के लिए आधुनिक हथियारों से हमला करके ये जितलाने का प्रयास किया कि हमारी बिल्ली हमी से म्याऊं ।की कहावत को चरितार्थ करते हुए इस देश की जनता को पलायन करने को मजबूर कर दिया।और दुनिया को दिखा दिया कि हम उन हथियारों के निर्माता हैं जिनकी तोड़ किसी के पास नही ।।                                             विचारणीय प्रश्न ये है कि ये परमाणु सम्पन्न देश उन्ही देशो पर हमला क्यो करते है जिनके पास एटमी हथियार नहीं हैं ये भी सोची समझी रणनीति है ।ये उन्ही देशों पर अपने हथियारों का प्रदर्शन करते हैं जो क्या तो गरीब हैं या विकासशील देश है ।ये देश इन सम्पन्न देशो के हथियारों की प्रयोगशाला बन गई हैं ।जैसे इराक,अफगानिस्तान,और अब यूक्रेन ।इन देशों के शासकों ने इन सम्पन्न देशों की शर्तों को मानने से इनकार कर दिया तो इन शासको सत्ताच्युत करने के लिए निरीह जनता पर प्रहार करके डर का माहौल पैदा कर दिया ।ताकि बाकी देश अपनी सुरक्षा मजबूत करने के लिए इन हथियार निर्माता देशों से हथियार खरीदें ।UNO जिसकी स्थापना इन गरीब देशों को न्याय दिलाने या सहायता के उधेश्य से की थी वो भी तमाशबीन बना देख रहा है याने इस पर भी इन्ही निर्मातावो का कब्जा है ।जिस तरह WHO फार्मा लॉबी के प्रभाव में है उसी प्रकार UNO भी हथियार लाबी के प्रभाव में है ।इस का अर्थ ये निकलता क्या तो हर देश परमाणु सम्पन्न बने या वो तमाम देश जो गरीब है विकासशील हैं उन्हें अपना अलग से संगठन बनाना चाहिए ताकि ऐसी परिस्थिति में एक जुट होकर उस आक्रमणकारियों का मुकाबला कर सके और उस देश का बहिष्कार करें ।नहीँ तो ये देश आधुनिक टेक्नोलॉजी के नाम पर नए हथियारों के नाम पर धन उगाहते रहेंगे और गरीब बने रहेंगे ।संगठन और संख्या में बहुत ताकत होती है उसका प्रदर्शन और उपस्थिति दर्ज कराए बिना ये हमले और शोषण इस हथियारलाबी का होता रहेगा ---क्रमशः--पेट्रोलियम लाबी 

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