बुधवार, 4 मई 2022

पेट्रोलियम लाबी

 विश्व के अर्थ तन्त्र की तीसरी लाबी पेट्रोलियम पदार्थ याने क्रूड ऑयल के उत्पादकों की है ।इस तेल के स्त्रोत मुख्यतया अरब,गल्फ देशों में है प्रकृति ने यही एक मुख्य खनिज इन देशों को बहुतायत में दे रखा है ।चूंकि इन देशों में लोकतंत्र नही के बराबर है इनके शासक मुगलकालीन खलिफावों के पास है,और इनके पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वो इस खनिज को एक्स्प्लोर करके रिफाइन करके मार्केटिंग कर सके ,इसलिए इस कार्य को अमरीका के यहूदी पूंजीपतियों ने अपनी रिफाइनरी डाल कर इन देशों के नवाबों को खनिज तेल का मूल्य देकर रिफाइन तेल उधोग पर कब्जा कर लिया ।और OPEC जैसी संस्था बना कर इसके भाव ,सप्लाई,और उत्पादन पर एकाधिकार स्थापित कर लिया ।चूंकि विश्व के एक छोटे से भाग में ही इसकी उपलब्धता है और मांग ज्यादा है ,साथ मे इसके व्यापार की ट्रेडिंग करने के लिए अमेरिकन करेंसी की बाध्यता लगा रखी है ।इसलिए इस व्यापार पर भी अमेरिकन पूंजीपतियों का कब्जा है ।सिर्फ रूस एक मात्र देश है जहां इसका भंडार बहुतायत में है,जो विश्व की जरूरतों का 30%पूरा कर सकता है इनकी रिफाईनरी पर यहूदियों का  स्वामित्व नहीं है, इस देश को साम्यवादी बता कर उसे नीचा दिखाने का प्रयास किया जाता रहा है ।।                                इस प्रकार इन तीनो लॉबियों (फार्मा, हथियार, आयल) के द्वारा विश्व पर राज करने के लिए समय समय पर इनका उपयोग डर का माहौल पैदा करके किया जाता रहा है चूकि ये इतने साधन संपन्न हो चुके हैं कि आने वाले भविष्य का निर्धारण भी इन्ही के हाथों में रहेगा ।ये चाहें तो विश्व मे लोकतांत्रिक व्यवस्था लाएं या तानाशाही इनके चंगुल से निकलना असम्भव सा लगता है ।विज्ञान का उपयोग जन सुविधावों की जगह विनाश के लिए किया जा रहा है ।इस भौतिकवाद ने सामाजिक ताना बाना ध्वस्त कर दिया ,मानवता खत्म हो रही है ।परिवार टूट रहे हैं लोगों का ध्यान पूँजीनिर्माण और सुरक्षित जीवन की और ज्यादा हो गया है ।जब परिवार टूटेगा जो राज्य,देशऔर विश्व की धुरी कहलाती है जब वोही टूट जाएगी तो इस विश्व का क्या होगा ? समाप्त 

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