फिर से किराया बड़ाने की बात उठेगी आखिर कब तक जनता पर बोझ डालोगे . सरकार पहले ये तय करे की रेल को उद्योग कीतरह चलाना चाहती है या जन हितार्थ .मेरा सुझाव है की मालगाड़ी के फेरे बडाये जाएँ बैगनो की संख्या बढाई जाये जिसके लिए बैगन कारखाने और बनाये जाये यदि फण्ड की कमी है तो रेलवे पब्लिक बांड जारी कर पब्लिक से रकम ले इस रकम से बैगन कारखाना खोले और माल दुलाई बढ़ाये . आज पॉवर प्रोजेक्ट्स कोयले की सप्लाई की कमी से चालू नहीं हो प् रहे हैं क्योंकि रेलवे के पास बैगन नहीं हैं नई लाइन नहीं हैं देश को बिजली की जरूरत है उद्योग चालू नहीं हो पा रहे कोल इंडिया के पास भरपूर कोयला है पर बैग्नो की कमी से सप्लाई नहीं कर पा रहा है .यदि मालगाड़ियो से भरपूर दुलाई हो तो पसेंजर ट्रेन का भाडा बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी .देश के बड़े शहरों की स्टेशनों को पपप के तहत मॉल रेस्तौरेंट खुलवाए जाएँ इस से ही इतना पैसा आजायेगा की रेलवे का घाटा तो देशके 4 महानगर की जमीन से ही मिल जायेगा . राजनीतक हस्तछेप बिलकुल बंद कर देना पड़ेगा रेलवे बोर्ड को स्वंतत्र निर्णय लेने का अधिकार देना चाहिए तथा समय सीमा और जवाबदारी तय करनी चाहिए
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