देश में 70 करोड़ मतदाता हैं जिसमे से 29 करोड़ मतदाता मत देते हैं ,उनमेसे भी 40%मत जिसको मिल जाते हैं वो सांसद या विधायक बन जाता है।याने 120 करोड़ पर 11करोड़ लोगों द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि इस देश के भाग्य विधाता बन गए।इन चुने हुए नेताओं में 50%अपराधी ,बाहुबली,या पूंजीपति प्रर्वती के लोग चुन कर आते हैं।इनमे न तो कोई डाक्टर , न वैज्ञानिक , न समाजशास्त्री और न ही कोई अर्थशास्त्री होता है।ये चारों लोग ही समाज को आगे ले जा सकते हैं।जब ये ही चुन कर नहीं आंएगे तो आम आदमी का उद्धार कैसे होगा।आज देश में आम आदमी का कोई प्रतिनिधि न तो संसद में है और न ही विधानसभा में। जब तक 80%जनता शिक्षित नहीं होगी तब तक इस देश में लोकतंत्र का फायदा इस प्रकार के लोग उठाते रहगे। देश फिर से सामंतवाद की और बढ़ रहा है रियासतों में बट रहा है जितने सांसद उतनी रियासत बनाने की तेयारी हो रही है।
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