शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2020

     हाथ की लकीरों पर कभी विस्वास मत करना।               नसीब उनके भी होते हैं जिनके हाथ नही होते।।      

बुधवार, 25 दिसंबर 2019

भारत में धर्म और रोजगार  
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  भारत में धर्म रोजगार पैदा करने वाला उधोग है। इसके विब्भिन्न धर्मस्थलों की स्थापना देश की भौगोलिक स्थिति को देख कर की गई है। जिससे देश के  सभी कोणों  के धर्मावलम्बीयो के  आवागमन से सभी धर्मो के मानने वालों  में सामंजस्य तथा विचार विनिमय हो सके। इन धर्मस्थलों  के पीछे के इतिहास की जानकारी के लिए भारी  तादाद में लोगों का आवागमन होता है ,जिससे पर्यटन उधोग पनपता है,तथा प्रत्येक की आवश्यकता की पूर्ति के लिए छोटे छोटे उधोगों का कारोबार बढ़ता है,रोजगार  उतपन्न होता है.    
विब्भिन धर्मावलम्बियों के धर्मस्थल विभिन्न प्रांतों और विभिन्न जिलों में स्थापित हैं। 
जिसके कारण विभिन्न बोलियों का भाषा का ज्ञान मिलता है ,विभिन्न प्रथावों ,रीतिरिवाजों का आदान प्रदान होता है समाजों को एक दूसरे को जानने का मौका मिलता है ,जिससे आपसी समन्वय ,समझ,एवं प्रगाढ़ता   बढ़ती है।  विभिन्न प्रथावों  के निभाने वाले खर्च से उपभोक्ता की मांग बढ़ती है और मांग की पूर्ति के लिए उधोग पनपते हैं,जिससे रोजगार उत्पन्न होता है जिससे  समाज में सम्पन्नता  के साथ  जीडीपी भी बढ़ती है। 
अर्थात धर्म रोजगार  का सृजन करता है ,एवं देश को आर्थिक रूप से   सम्पन्न बनाने ,लोगों को स्वाबलंबी बनाने में सहयोग प्रदान करता है।    

मंगलवार, 24 दिसंबर 2019

जीडीपी------                                              .                     भारतीय जीडीपी और पश्चिमी जीडीपी की परिभाषा को कोई तालमेल नही है। पश्चिम के लोगों का सामाजिक द्रष्टिकोण और भारतीयों के सामाजिक द्रष्टिकोण में बहुत अंतर है। वहां का समाज एक दुसरे के सीमित सम्बन्धों वाला होने के कारण प्रत्येक कार्य का आर्थिक लाभ ढूंढता है,जबकी भारतीय समाज एक दूसरे के संबंधों के कारण प्रत्येक कार्य को धर्म समझता है।एक दूसरे के काम आना यह स्वभाव होता है हर भारतीय का ।जबकि पश्चिम में कार्यों का मूल्यांकन के आधार पर क्रियान्वयन होता है।अर्थात सेवा क्षेत्र को आर्थिक गतिविधि न मानकर सामाजिक गतिविधि माना जाना चाहिए । इसलिए सेवा क्षेत्र को जीडीपी से जोड़ना अनुचित है। पश्चिमी देशों द्वारा सामाजिक दायित्वों के आर्थिक  मूल्यांकन ने समाज मे दूरियां बढ़ाई तथा सामाजिक कार्य करने वाली संस्थाओं का समाज के प्रति दायित्व निभाने की प्रवर्ति में बदलाव आने लगा ।जिससे गरीब व्यक्ति की जरूरतों की पूर्ति पर प्रभाव पड़ने लगा ।                                             

शुक्रवार, 10 अप्रैल 2015

JABALPUR KA VIKAS

जबलपुर MIGRATE   लोगों का बसा हुवा शहर  है इसका कारण यहाँ स्थापित सुरक्षा संस्थानों की लाखों करोड़ों की लगत से लगी फैक्ट्रीज इन्ही फैक्ट्रियों में काम करने के लिए देश हर कोने से लोग काम करने आये और यहीं बस गए ।आज इन फैक्ट्रियों में काम नहीं है जो हो रहा है उसका R.O.I  निकला जाये तो माइनस  में निकलेगा ,जब की सुरक्षा सामग्री का आयात  भारत में विदेशो से ६७%होता है क्यों न इन संस्थानों में नया INVESTMENT करके नई  technology लाकर इन्हे upgrade  किया जाये जिससे यहाँ के लोगों को रोजगार मिल सके ,आखिर DRDO  क्या कर रहा है १७ साल में एक तेजस विमान बनाया क्या इस देश में वैज्ञानिको की कमी है वे तो आत्महत्या कर रहे हैं उन्हें प्रोत्साहित  क्यों नहीं किया  जाता। मोदी जी ने MAKEININDIA  का नारा दिया है ,उसको फलीभूत कब करेंगे , जब मंगल यान १/५ कीलागत  से लॉन्च कर सकते हैं तो आधुनिक हथियार कम  लागत  में क्यों नहीं बना सकते ,विदेशों से पूँजी की मांग करते है जबकि इस देश में भरपूर पूँजी है यहाँ के पूंजीपति विदेशो में कम्पनियों को खरीद रहे हैं क्या वे इस देश में पूंजी नहीं लगाएंगे। जबकि इन फैक्ट्रियों के पास हजारों एकड़ जमीन फालतू पड़ी है स्किल लेबर है सुरक्षा के सब साधन हैं फिर इस तरफ ध्यान क्यों नहीं ?वयवसाय संगत योजना बनानी पड़ेगी। इस देश की महिलाओं के पास दुनिया के  ११ देशो  के बराबर का  सोना है यहाँ के मंदिरों के पास अटूट स्वर्ण भंडार है देश में  भरपूर धन है. जरूरत नियत और विश्वास की है
          १९८४ के बाद पूर्ण बहुमत की सरकार आई है देश और प्रदेश में एक ही पार्टी की सरकार है निर्णय लेने में कठिनाई नहीं होनी चाहिए। G.C.F ,O.F.K. V.F.J. G.I.F और TELECOM FACTORY जैसी विशाल  फैक्ट्रियों के होते इस शहर का विकास नहीं होना इस शहर के जनप्रतिनिधियों की इच्छाशक्ति  की कमी दर्शाती है। समय रहते इस और ध्यान नहीं दिया तो इस शहर का नोजवान  क्या तो नशे की शरण में चला जायेगा या फिर अराजकता फैलाएगा। इन फैक्ट्रियों में कम  से कम  १ लाख लोगो को नौकरी मिल सकती है जो पहले थी जिससे ५ लाख लोगों का जीवन स्तर  ऊँचा होगा तथा शहर का ट्रेड भी बढ़ेगा आस पास के जिलों का व्यापार भी इस शहर को मिलेगा 
        नेहरू ने आजादी के बाद देश में बड़े उधोग सरकारी छेत्र  में लगवाये क्योंकि उस वक़्त कोई बड़ा पूंजीपति इस देश में नहीं था इन उधोगोंको  लगवाने के पीछे मुनाफा कमाना उद्देश्य नहीं था बल्कि लोगों को रोजगार देना और देश की जरूरतों को पूरा करना था। अब इस सरकार को भी इस और ध्यान देते हुए इस शहर की तरक्की के लिएairconnectivity  सभी बड़े शहरों से जोड़नी होगी बाईपास रोड बनानी होगी तभी इस शहर का विकास हो सकता है। 

गुरुवार, 6 नवंबर 2014

सुझाव

भारत में ६३८५९६ गावं हैं इनमे से अति पिछड़े गावों को चिन्हित करके उनके उत्थान के लिए यदि मोदी जी की तरह सभी साँसद , जो कि ८१५ और विधायक जो कि ४२१५ हैं दो, दो गावं गोद ले लेते हैं और बड़े ,व्यापारी घराने तथा सामाजिक संगठन मिल कर दो ,दो गावों को गोद लेते हैं तो भारत में हर साल ५०००० गावों का उत्थान हो सकता है। गावों के विकास के लिए मनरेगा के बजट का उपयोग करके अलग से धन की भी वयवस्था नहीं करनी पड़ेगी ,हर गावं को मुख्य सड़क से जोड़ना ,पीने  के पानी का इंतजाम ,१० गावों के बीच हॉस्पिटल ,solar energy से बिजली तथा हर घर में शौचालय और मिडिल स्कूल तक शिक्षा का इंतजाम  सकता है। जहां  तक गावों को स्वाबलम्बी बनाने का सवाल है तो हर क्षेत्र में पैदा होने वाले उत्पाद की अपनी एक विशेषता है उसकी यदि मार्केटिंग की जाये और उचित मूल्य दिलाया जाये तो हर गावं स्वाबलंबी हो सकता है। 

गुरुवार, 21 अगस्त 2014

आर्यों  के द्वारा दिया गया आर्याव्रत नाम ,यमन और मुगलों द्वारा दिया गया हिंदुस्तान ,द्रविड़ और श्रमण द्वारा दिया गया भारत नाम , और वर्तमान में बोले जानेवाला भारत कौन सा सही है क्या आरएसएस के प्रमुख के से पूछना पड़ेगा ?

रविवार, 15 सितंबर 2013

असंतुलित विकास

१९४७ में देश की जीडीपी में ५७%हिस्सा कृषि क्षेत्र का था जो देश की ६०%जनता का पेट भरता था /आज २०१३ में देश की जीडीपी का ६०%हिस्सा सेवा क्षेत्र का है जो मात्र २० लाख लोगों को रोजगार प्रदान करता है /ओद्योगिक सेक्टर का जीडीपी में  हिस्सा १४% है क्योंकि देश में एजुकेशन ,हेल्थ ,और कुशल कारीगरों का अभाव है /क्योंकि सरकार ने  अच्छी शिक्षा ,स्वास्थ्य और कोशल विकास पर ध्यान दिया /किसी भी देश को आर्थिक रूप से संपन्न होने के लिए उपरोक्त तीनो चीजों की जरुरत होती है /जिससे उत्पादन बढता है तो क्रय शक्ति बढती  है तो देश का समग्र विकास होता है
सेवा क्षेत्र के योगदान से देश की विकास दर कागजों में तो बढ़ी लेकिन इसका फायदा देश की I.T सेक्टर की कंपनियों के मालिकों को ज्यादा हुवा /इससे उस बेरोजगार कृषक पुत्र को कुछ नहीं मिला जिसका हिस्सा ६०%से घाट कर १४%रह गया /इस कृषक के घर में जन्मा वह नौजवान जिसकी उम्र २५ से ३५ साल के बीच में है उसे अच्छी शिक्षा ,अच्छे स्वास्थ्य ओर कोशल के अभाव ने  बेरोजगार बना दिया इन  युवा बेरोजगारों  की फोज को जब रोजगार नहीं मिलेगा  तो ये नक्सलवाद ओर अराजकता फ़ैलाने में देर नहीं करेंगे /
आज ताइवान ,चाइना ,कोरिया ,जापान ,मैन्युफैक्चरिंग का उनके देश की जीडीपी में ३०%का हिस्सा क्योंकि इन देशों ने सबसे पहले शिक्षा ,स्वास्थ्य और कोशल विकास पर ध्यान दिया
भारत में ४८%बच्चे कुपोषण के शिकार हैं जो किसी भी अफ्रीकन देस्ग की आबादी के बराबरहै/ जब यही कुपोषित बच्चे जवान होंगे तो इनकी कार्यछमता के क्या परिणाम होंगें सोचकर दर लगता है /१४% की क्रषि आमदनी पर देश की ५७%जनता अभावग्रस्त जीवन जी रही है /इनका जीवन कैसा होगा कल्पना करने से भयावह स्थिति निर्मित होती है /जब तक कृषि पर आश्रित जनसमुदाय का कौशल विकास करके ओद्योगिक क्षेत्र में नहीं लगाया जायेगा तबतक न तो कृषि का क्षेत्र मुनाफे में आयेगा और न ही देश का आर्थिक ढाचां मजबूत होगा /रोजगार के अवसर क्या तो उद्योग में हैं या निर्माण में जिनमे बहुसख्यक लोगों को अवसर मिलता है /यही देश के विकास की पहली सीढ़ी है, परन्तु इसके लिए शिक्षा ,स्वास्थ और कोशल प्रथम सीढ़ी है /