भारत में धर्म और रोजगार
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भारत में धर्म रोजगार पैदा करने वाला उधोग है। इसके विब्भिन्न धर्मस्थलों की स्थापना देश की भौगोलिक स्थिति को देख कर की गई है। जिससे देश के सभी कोणों के धर्मावलम्बीयो के आवागमन से सभी धर्मो के मानने वालों में सामंजस्य तथा विचार विनिमय हो सके। इन धर्मस्थलों के पीछे के इतिहास की जानकारी के लिए भारी तादाद में लोगों का आवागमन होता है ,जिससे पर्यटन उधोग पनपता है,तथा प्रत्येक की आवश्यकता की पूर्ति के लिए छोटे छोटे उधोगों का कारोबार बढ़ता है,रोजगार उतपन्न होता है.
विब्भिन धर्मावलम्बियों के धर्मस्थल विभिन्न प्रांतों और विभिन्न जिलों में स्थापित हैं।
जिसके कारण विभिन्न बोलियों का भाषा का ज्ञान मिलता है ,विभिन्न प्रथावों ,रीतिरिवाजों का आदान प्रदान होता है समाजों को एक दूसरे को जानने का मौका मिलता है ,जिससे आपसी समन्वय ,समझ,एवं प्रगाढ़ता बढ़ती है। विभिन्न प्रथावों के निभाने वाले खर्च से उपभोक्ता की मांग बढ़ती है और मांग की पूर्ति के लिए उधोग पनपते हैं,जिससे रोजगार उत्पन्न होता है जिससे समाज में सम्पन्नता के साथ जीडीपी भी बढ़ती है।
अर्थात धर्म रोजगार का सृजन करता है ,एवं देश को आर्थिक रूप से सम्पन्न बनाने ,लोगों को स्वाबलंबी बनाने में सहयोग प्रदान करता है।
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