गुरुवार, 3 सितंबर 2026

लोकतांत्रिक देशों पर औधोगिक घरानों का कब्जा



 पूरे विश्व मे ब्रिटेन एक मात्र देश रहा है जिसने 167 देशों को अपने अधीन रखा ।इन देशों में इसने अपने बड़े बड़े व्यापारियों को व्यापार करने के लिए भेजा और वहां जाकर इन व्यापारियों ने  संगठित होकर उन देशों की जमीनों पर कब्जा किया और खरीदा ।जैसे 1756 से 1803 तक ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत मे यहां के मसाले और कपड़े के व्यापार के लिए प्रवेश किया और 20 करोड़ की जनसँख्या वाले देश  पर कब्जा कर लिया ।इसी प्रकार (HUDSON BAY COMPANY) ने फर के व्यापार के लिए  कनाडा में प्रवेश किया और उस देश की जमीनों पर कब्जा कर लिया ।और जब स्थानीय जनता द्वारा विरोध किया तो इन्ही कंपनी ने इस देश को ब्रिटिश सरकार को बेच दिया ।इसी प्रकार अन्य देशों को भी इन्ही कंपनियों ने ब्रिटिश सरकार को बेच दिया । और इन देशों पर ब्रिटेन का कब्जा हो गया ।।                                                     ब्रिटेन में भी लोकतंत्र की जगह राजतंत्र था ,जॉर्ज पंचम के निधन के बाद वहां के बड़े बड़े पूंजीपतियों ने एक संगठन बना कर ब्रिटेन की महारानी को लोकतांत्रिक व्यवस्था से शासन करने की सलाह दे कर उन्हें महारानी पद देकर राष्ट्र प्रमुख बनाया।तथा संसदीय प्रणाली से देश के राजतंत्र को संचालित करने का  अलिखित सविंधान  बनाया ।तथा संसद के लिए चुने हुए पूंजीपति प्रतिनिधियों से विश्व पर शासन किया                     यही पद्धति अब वर्तमान में लोकतांत्रिक देशों में लागू करने का प्रयास किया जा रहा है , उन देशों  के या विश्व के औधोगिक घरानों के द्वारा पूंजी का निवेश करके। दुनिया की कुछ टेक कंपनियां  आर्थिक रूपसे इतनी सम्पन्न हो गई हैं उनका मूल्यांकन कई देशों की GDP से  भी अधिक है।जैसे अनेबिडिया का बाजार मूल्य 5 ट्रिलियन डॉलर से भी अधिक है जबकि विशव की 3री बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी से भी ज्यादा ।इसीप्रकार एप्पल का मूल्य ब्रिटेन की GDP से अधिक है,और अल्फाबेट का मूल्य फ्रांस से अधिक है ।जैसे ईस्ट इंडिया कंपनी ने कॉपोरेट लॉबिंग की शुरुवात की थी और उसी लाबिंग के कारण भारत जैसे 20 करोड़ की आबादी वाले देश पर कब्जा किया था ।उसी का अनुसरण करते हुए आज की दिग्गज कंपनियां 2025 की पहली छ माही में 36 मिलियन डॉलर की लॉबिंग कर चुकी हैं ।यदि यही सिलसिला चलता रहा तो ये कंपनियां छोटे छोटे लोकतांत्रिक देशों की न्यायपालिका, कार्यपालिका, विधायिकाऔर मीडिया को अपने प्रभाव में ले कर उन देशों की सरकारों के माध्यम से उन देशों के संसाधनों पर कब्जा करके उसकी कमाई अपने शेयर धारकों में बांटकर संचय करेंगी।तथा वहाँ की जनता को रेवड़ी बांट कर वोट लेकर उन देशों पर राज करती रहेंगी।समय रहते इन देशों के बुद्धिजीवी वर्ग या जागरूक तबका सचेत नहीं हुवा तो पूंजीवादी लोकतांत्रिक देश बन कर रह जाएंगे ।