गुरुवार, 20 अगस्त 2026

भारत मे प्राथमिक शिक्षा का स्तर

 सन 2014 में जब से नई NDA/BJP की सरकार आई है तब से देश मे शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है।जहां 2014 से पहले भारत के टोटल बजट का 4.6% का आबंटन शिक्षा के लिए होता था वो घट कर 2.6%हो गया 2026-27 में अर्थात 1,39,289 करोड़ रुपये जिसमे से 83,562रु करोड़ स्कूलों के लिए और 55,727 करोड़ रु उच्चशिक्षा के लिए आबंटित हुए ।।                                                                      1--भारत मे 2025-26  में4791 स्कूल बंद हुए या विलय हुए ।अर्थात प्रतिदिन 13 स्कूल बंद/विलय हुए ।जिसमे सबसे ज्यादा mp में 2426 स्कूल बंद हुए। पिछले 10 वर्षों में 94000 स्कूल बंद हो गए ।।               जहां 2024-25 में 14,71,473,स्कूल थे ,वहां 2025,-26 में 14,66,682 स्कूल बच गए ।अर्थात 4791 स्कूल बंद हो गए ।।              2--- भारत मे 7993 स्कूल ऐसे हैं जहां पर एक भी छात्र नहीं है ।इसमे पश्चिम बंगाल,तेलंगाना सबसे आगे है ।।                                              3--एक शिक्षक वाले स्कूलोँ की संख्या 1 लाख से भी अधिक  क्या तो ये स्कूल जर्जर हालत में हैं या इनमें न तो पानी,शौचालय की व्यवस्था है।इनके सुधार के लिए 7500 करोड़ का आबंटन हुवा है।।                        4-- मप्र सरकार ने अपने टोटल बजट 4,38,317 में से 31,953 करोड़ का आबंटन किया है जो 13.7%होता है जबकि राष्ट्रीय स्तर 14.5%से कम है ।।                                                                                 5---देश के 4791बंद हुयड स्कूलों में सबसे ज्यादा 2426 इसी प्रदेश में हुए हैं इसी प्रदेश में 1895 स्कूल शिक्षक विहीन भी है शिक्षकों के टोटल पदों 2.89 लाख में से 1.15 पद खाली पड़े हैं ।।                                   6-- इसी प्रदेश में 5000 स्कूल जर्जर अवस्था मे हैं, 3400 स्कूलों। शौचालय नहीं हैं। 2 लाख बच्चों ने दाखिला नहीं लिया ,इसी सम्बद्ध में जबलपुर हाई कोर्ट ने सरकार से जवाब तलब किया है।                        7--  तमिलनाड में 23 इंजीनियरिंग कॉलेजों में 0 दाखिला हुवा इस वर्ष दैनिक भास्कर की रिपोर्ट 20 अगस्त 26 के अनुसार ,6 वर्ष में93 कॉलेज बंद हो गए ।5 साल में 19 लाख इंजीनियरिंग की सीटें खाली रही 2025-26 में58  इंजीनियरिंग तकनीकी संस्थानों में दाखिले बंद हो गए और 950 कोर्स बंद हो गए ।।                                                         जब शिक्षा की ये स्थिति हो तो किस आधार पर आप विश्वगुरु बनने का प्रचार कर रहे हैं ।समस्या गंभीर होती जा रही है सरकारों को इसे गंभीरता से लेना होगा नहीं तो छात्र सड़क पर उतरने लगे तो सम्भालना मुश्किल हो जाएगा ।