भारत जैसे विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश मे पिछले 10 वर्षों से शासित पार्टी ने रेवड़ी नामक हथियार ईजाद किया है ।जिस देश का विश्व के गरीब देशों में 136वां स्थान हो उससे समझ मे आता है कि इस देश मे गरीबों की कितनी संख्या है ।पूरे यूरोप की जनसंख्या से दो गुनी जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रही है ।इन गरीबों को एन चुनाव के एक या दो माह पहले फ्री राशन ,आवास ,बाथरूम,के नाम से नाम मात्र की राशि लाडली बहना जैसी घोषणाएं करके उनके वोट से सत्ता पर काबिज होने का जरिया बना लिया है ।देश का 56% मध्यम वर्ग जिसका देश की टोटल इनकम में 80% भागीदारी है उसे इन घोषनावों से कोई लाभ नहीं मिलता ।और देश की 10% जनसंख्या जो खुशहाल है उनकी भागीदारी देश की इनकम में सिर्फ 4%है उन्हें सभी भौतिक सुविधाएं मिल रही हैं ।और देश का लगभग 1% पूंजीपति वर्ग जिसकी पूंजी प्रतिवर्ष बढ़ती ही जा रही है ।इससे साबित होता है कि वर्तमान राजनीतिक पार्टियां इन पूँजीपतियों की सुविधा के लिए बहुसंख्यक गरीब जनता को रेवड़ी देकर गरीब ही बनाये रखना चाहती है ।तथा उसे नक्कारा भी बना रही है ताकि उन्हें साधारण जीविका का प्रलोभन दे कर सत्ता में बने रहैं ।ये देश के भविष्य के लिए घातक साबित होगा देश पूंजीपतियों की ग्रिफ़्त चला जाएगा और विश्व पटल पर नाम मात्र के लिए लोकतांत्रिक देश कहलायेगा।इसके लिए देश के बुद्धिजीवी वर्ग को सड़क पर निकल कर इस गरीब ,वंचित जनता को जाग्रत करना होगा ।क्रमश:
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