गुरुवार, 25 जनवरी 2024

प्रकृति द्वारा मनुष्य की योग्यता और क्षमता का चयन ।

 अडोल्फ हिटलर के अनुसार ,प्रकृति व्यक्ति की प्रजनन क्षमता को कम नहीं करती अपितु वह तो उत्पन्न व्यक्ति के अस्वस्थ और नकारा होने पर नष्ट करती है ।अस्तित्व के संघर्ष में जो जिंदा बच गया प्रकृति उसका बार बार निरीक्षण ,परिछन करके समर्थ और योग्य बनाती है ।ताकि प्रजनन प्रक्रिया को जारी रखे ।योग्यतम के चुनाव की यह प्रक्रिया अनवरत जारी रहती है ,व्यक्ति के प्रति प्रकृति के इस व्यवहार से साफ होता है कि प्रकृति जाति और वर्गों की शक्ति की रक्षा करती है और उसे उत्कृष्टता की श्रेष्ठतम की सीढ़ी तक पहुँचा देती है ।।         प्रकृति के इस प्रकार के संबंध में संख्या में न्यूनता का अर्थ शक्ति का संवर्द्धन और आखिरकार जाति का उन्नयन निहित है ।यदि व्यक्ति स्वंय जनसंख्या को कम करना शुरू करदे तो मसला दूसरा होता है ।मनुष्य प्रकृति का स्थान कभी नहीं ले सकता ,क्योंकि उस की सीमा है ,उसमे योग्यता के चयन की क्षमता नहीं है ,वह तो केवल प्रजनन को रोक सकता है ।।                                                                  प्रकृति प्रजनन पर रोक नहीं लगती, हाँ पैदा हुए प्राणियों के हुजूम से श्रेष्ठतम का चुनाव जरूर कर लेती है ।और उसे जीवित रहने की मुहर जरूर लगाती देती है ।   

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