पूरे विश्व की जनसंख्या की 15% आबादी यूरोप और अमरीका में बस्ती है ।जिसमे चीन और भारत मे 40% आबादी तथा अफ्रीका और मध्यपूर्व के इस्लामिक देशों 45% आबादी निवास करती है । परन्तु पूरे विश्व पर ये 15%आबादी वाले देश टेक्नोलॉजी के कारण अपनी आर्थिक नीतियों के पालन पर जोर डालते है ।विश्व का खनिज संपदा से भरपूर अफ्रीका सबसे पिछडॉ महाद्वीप माना जाता है ।मध्यपूर्व तेल संपदा के कारण सम्पन्न राष्ट्रों का छेत्र कहलाता है ।भारत मानव संपदा के कारण विकासशील राष्ट्रों में गिना जाता है । चीन साम्यवादी तानाशाही के कारण औद्योगिक राष्ट्र के रूप में जाना जाता है ।यूरोप और अमेरिका टेक्नोलॉजी और हथियारों के आधार पर दुनिया के विकसित देशों में गिने जाते हैं ।इस पर गहराई से विचार किया जाए तो कौन से देश किन देशों का शोषण कर रहें हैं तो लगता है कि बिना मानव संपदा ,बिना खनिज संपदा और बिना किसी संस्कृति के ये राष्ट्र दुनिया की 85%जनता का आर्थिक शोषण कर रहे हैं ।और विश्व के सिरमौर बन कर दुनिया पर राज कर रहें है ।यदि अफ्रीका महाद्वीप,एशिया महाद्वीप, और मध्यपूर्व के देश मिलकर अपनी करेंसी निकाल ले तो इनका शोषण बन्द किया जा सकता है ।इनका व्यापार अपनी मुद्रा में होने लग जाये तो यूरोप और अमरीका अपने आप इन राष्ट्रों के आगे नतमस्तक हो जाएंगे राष्ट्रों के बीच होने वाले झगड़े जब बन्द हो जाएंगे तो इनसे हथियार कौन खरीदेगा तब इस विध्वंसक टेक्नोलॉजी को कौन अपनाएगा ।जो इनके विकास का पैमाना है ।
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