विश्व के अर्थ तन्त्र की तीसरी लाबी पेट्रोलियम पदार्थ याने क्रूड ऑयल के उत्पादकों की है ।इस तेल के स्त्रोत मुख्यतया अरब,गल्फ देशों में है प्रकृति ने यही एक मुख्य खनिज इन देशों को बहुतायत में दे रखा है ।चूंकि इन देशों में लोकतंत्र नही के बराबर है इनके शासक मुगलकालीन खलिफावों के पास है,और इनके पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वो इस खनिज को एक्स्प्लोर करके रिफाइन करके मार्केटिंग कर सके ,इसलिए इस कार्य को अमरीका के यहूदी पूंजीपतियों ने अपनी रिफाइनरी डाल कर इन देशों के नवाबों को खनिज तेल का मूल्य देकर रिफाइन तेल उधोग पर कब्जा कर लिया ।और OPEC जैसी संस्था बना कर इसके भाव ,सप्लाई,और उत्पादन पर एकाधिकार स्थापित कर लिया ।चूंकि विश्व के एक छोटे से भाग में ही इसकी उपलब्धता है और मांग ज्यादा है ,साथ मे इसके व्यापार की ट्रेडिंग करने के लिए अमेरिकन करेंसी की बाध्यता लगा रखी है ।इसलिए इस व्यापार पर भी अमेरिकन पूंजीपतियों का कब्जा है ।सिर्फ रूस एक मात्र देश है जहां इसका भंडार बहुतायत में है,जो विश्व की जरूरतों का 30%पूरा कर सकता है इनकी रिफाईनरी पर यहूदियों का स्वामित्व नहीं है, इस देश को साम्यवादी बता कर उसे नीचा दिखाने का प्रयास किया जाता रहा है ।। इस प्रकार इन तीनो लॉबियों (फार्मा, हथियार, आयल) के द्वारा विश्व पर राज करने के लिए समय समय पर इनका उपयोग डर का माहौल पैदा करके किया जाता रहा है चूकि ये इतने साधन संपन्न हो चुके हैं कि आने वाले भविष्य का निर्धारण भी इन्ही के हाथों में रहेगा ।ये चाहें तो विश्व मे लोकतांत्रिक व्यवस्था लाएं या तानाशाही इनके चंगुल से निकलना असम्भव सा लगता है ।विज्ञान का उपयोग जन सुविधावों की जगह विनाश के लिए किया जा रहा है ।इस भौतिकवाद ने सामाजिक ताना बाना ध्वस्त कर दिया ,मानवता खत्म हो रही है ।परिवार टूट रहे हैं लोगों का ध्यान पूँजीनिर्माण और सुरक्षित जीवन की और ज्यादा हो गया है ।जब परिवार टूटेगा जो राज्य,देशऔर विश्व की धुरी कहलाती है जब वोही टूट जाएगी तो इस विश्व का क्या होगा ? समाप्त
बुधवार, 4 मई 2022
हथियार लाबी
कोरोना वायरस की महामारी से पूरी दुनिया निजात पाने ही वाली थी कि रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया ।रूस ने अपने पुराने हो चुके जंक खाते हथियारों का जखीरा खत्म करने के लिए तथा नए हथियारों के प्रदर्शन से दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमरीका को चुनोती देते हुए ,किसी समय USSR का हिस्सा रहा यूक्रेन जिसने नाटो की सदस्यता के लिए आवेदन किया था को सबक सिखाने के लिए आधुनिक हथियारों से हमला करके ये जितलाने का प्रयास किया कि हमारी बिल्ली हमी से म्याऊं ।की कहावत को चरितार्थ करते हुए इस देश की जनता को पलायन करने को मजबूर कर दिया।और दुनिया को दिखा दिया कि हम उन हथियारों के निर्माता हैं जिनकी तोड़ किसी के पास नही ।। विचारणीय प्रश्न ये है कि ये परमाणु सम्पन्न देश उन्ही देशो पर हमला क्यो करते है जिनके पास एटमी हथियार नहीं हैं ये भी सोची समझी रणनीति है ।ये उन्ही देशों पर अपने हथियारों का प्रदर्शन करते हैं जो क्या तो गरीब हैं या विकासशील देश है ।ये देश इन सम्पन्न देशो के हथियारों की प्रयोगशाला बन गई हैं ।जैसे इराक,अफगानिस्तान,और अब यूक्रेन ।इन देशों के शासकों ने इन सम्पन्न देशों की शर्तों को मानने से इनकार कर दिया तो इन शासको सत्ताच्युत करने के लिए निरीह जनता पर प्रहार करके डर का माहौल पैदा कर दिया ।ताकि बाकी देश अपनी सुरक्षा मजबूत करने के लिए इन हथियार निर्माता देशों से हथियार खरीदें ।UNO जिसकी स्थापना इन गरीब देशों को न्याय दिलाने या सहायता के उधेश्य से की थी वो भी तमाशबीन बना देख रहा है याने इस पर भी इन्ही निर्मातावो का कब्जा है ।जिस तरह WHO फार्मा लॉबी के प्रभाव में है उसी प्रकार UNO भी हथियार लाबी के प्रभाव में है ।इस का अर्थ ये निकलता क्या तो हर देश परमाणु सम्पन्न बने या वो तमाम देश जो गरीब है विकासशील हैं उन्हें अपना अलग से संगठन बनाना चाहिए ताकि ऐसी परिस्थिति में एक जुट होकर उस आक्रमणकारियों का मुकाबला कर सके और उस देश का बहिष्कार करें ।नहीँ तो ये देश आधुनिक टेक्नोलॉजी के नाम पर नए हथियारों के नाम पर धन उगाहते रहेंगे और गरीब बने रहेंगे ।संगठन और संख्या में बहुत ताकत होती है उसका प्रदर्शन और उपस्थिति दर्ज कराए बिना ये हमले और शोषण इस हथियारलाबी का होता रहेगा ---क्रमशः--पेट्रोलियम लाबी
3 लॉबियों की ग्रिफ्त में दुनिया 1 फार्मा लाबी
1) फार्मा लॉबी :--फरवरी2020 में विश्व मे फार्मा लॉबी ने कोरोना वायरस फैला कर एक नई महामारी को ईजाद करके विश्व मे हड़कम्प मचा दिया । करोड़ों लोग इस बीमारी की ग्रिफ्त में आये, करोड़ो लोग मर भी गए ।लेकिन इस कि दवाई आज तक ईजाद नही हो पाई।इस बीमारी की दहशत ने लोगों को घरों में कैद कर दिया ।शहरों में लोकडाउन कर दिया गया ।जिनके पास जो भी जमा पूंजी थी उन्होंने इस बीमारी से बचने के लिए खर्च कर दी न पूंजी बची न मरीज ।इस वायरस ने पहले बूढ़ों को और बाद में जवानों को और अब बच्चों को ग्रिफ्त में लेने की who द्वारा सूचित किया गया । इसके बचाव के लिए मास्क ,पीपी किट,सैनिटाइजर का उपयोग जरूरी करके इस उधोग को जो मरणासन्न पड़ा था उसको अम्रत पिला दिया ।इस बीमारी ने वो अस्पताल जो बन्द होने की कगार पर थे उन्हें हाई टेक बना दिया ।एक साल क़े बाद इस वायरस की वेक्सीन ईजाद की गई उसे जरूरी बता कर करोड़ो का धन कमाया गया ।अर्थात फार्मा लॉबी ने वायरस का डर फैला कर पूरी दुनिया के अर्थ तन्त्र को बर्बाद कर दिया और खुद दशाब्दियों के लिए आबाद हो गया ।फार्मा क्षेत्र को छोड़कर बाकी सभी उद्योग दिवालियापन की हद तक पहुंच गए ।इस बीमारी से मरने वालों का तो आंकड़ा सरकारों के पास है ।लेकिन भुख और दिवालिया होने के डर से आत्महत्या करनेवालों का आंकड़ा इनके पास नही है।जिसका असर दो साल बाद अब दिखने लगा है ।इससे साबित होता है कि इन आंकड़ों की बाजीगिरी से जनता में भय का वातावरण निर्मित होगा जिससे लोग डॉक्टरों और अस्पतालो में जाएंगे और इनका व्यापार और बढ़ेगा।जिस तरह डर का दूसरा नाम भगवान है उसी तरह डॉक्टर का दूसरा नाम भगवान (डर) बन गया ।इन तमाम अंतरराष्ट्रीय फार्मा कंपनियों के मालिक बहुतायत में अमेरिकन (यहूदी व्यापारी)हैं और चीन में इनका उत्पादन होता है ।इन दोनों ने मिलकर इस वायरस को विश्व मे फैलाया और विश्व पर शासन करने का प्रयास किया ।वो तो अच्छा हुवा भारत के लोगों का भौगोलिक स्थिति प्राकृतिक मौसम और भारतीय खान पान की वजह से यहां के लोगों का इम्यून सिस्टम मजबूत था नही तो इस वायरस से करोड़ो जाने जाती ।सरकारों को चाहिए इस प्रकार की लाबी का भंडाफोड़ किया जाए ओर जन हित मे कार्य करने के लिए इन पर दबाव बनाया जाए ।ताकि भविष्य में कोई संस्था इस प्रकार का कुकृत्य करने के पहले सोचने को मजबूर किया जाए ।इसमे UNO को हस्तक्षेप करके WHO का पुनर्गठन किया जाए का प्रस्ताव सभी सदस्य को देना चाहिए ।----अगली कड़ी --हथियार लाबी --