भारत मे 31%मध्यम वर्ग रहता है।13% निम्न वर्ग 52% निम्न मध्यम वर्ग और 4% उच्च वर्ग निवास करता है ।तथा इस देश मे 10 लाख से अधिक जनसँख्या के कुल 63 शहर हैं ।जिसमे 27% मध्यम वर्ग और 43% उच्च वर्ग के लोग निवास करते हैं।और देश का 27% खर्च इन्ही शहरों पर होता है ।तथा देश देश की कुल बचत का 38% हिस्सा भी इन्ही शहरों से आता है ।इनमे मध्यम वर्ग का इस देश के विकास में भी अहम भूमिका है । ये मध्यम वर्ग ही इस देश की GDP में 50% का हिस्सेदार है,देश के कुल खर्च में इस वर्ग की 48% हिस्सेदारी है ।देश की कुल बचत में 56% हिस्सेदारी भी इसी वर्ग की है ,इनकमटैक्स जनरेशन में भी 51% की हिस्सेदाई है इतना सब देने के बाद किसी की भी सरकार रही हो इस वर्ग के भविष्य के प्रति किसी ने कोई योजना नहीं बनाई।जबकि उच्च वर्ग ,जिसकी आबादी 4% है तथा जिनका न तो जीडीपी में ,न खर्च में ,न बचत में कोई हिस्सेदारी है,उनके प्रति सरकारें सारी सुविधाएं देती रहीं हैं ।ये फर्क क्यों इस पर मध्यम वर्ग को आवाज उठानी चाहिए। दूसरी तरफ प्रति सांसद को प्रति वर्ष 27लाख तनख्वाह मिलती है,दूसरे भत्ते भी करीब 10 लाख तक के सालाना मिलते हैं ,इसी प्रकार विधायकों को मंत्रीयो कोभी इससे कुछ कम तनख्वाह और भत्ते मिलते हैं । जिन्हें सत्ता सुख भोगने के लिए वोट चाहिए इसके लिए कोई शैक्षणिक योग्यता की जरूरत नहीं ,इस सत्ता को पाने के लिए पूंजी और वोट चाहिए,पूंजी इन्हें उच्च वर्ग जिनकी संख्या 4% हैउनसे मिल जाती है ,और वोट इन्हें 13%निम्न वर्ग और 52% निम्नमध्यवर्ग के रेवड़ी के माध्यम से मिल जाता है ,इन्हें 31% मध्यम वर्ग और 4% उच्च वर्ग के वोट की जरूरत नहीं ।और यही वर्ग किसी सरकार से सन्तुष्ट नहीं होता ईसे सिर्फ आलोचना करनी है और गाल बजाना आता है । इसलिए राजनेतावों ने इन्हें पहचान लिया है इसलिए इस वर्ग कीं इन्हें जरूरत नहीं है ।इस प्रकार इस देश मे लोकतंत्र के नाम अघोषित राजतन्त्र कायम हो गया। जो पूर्व में क्षेत्रीय राजा शासन करते थे।वही स्थिति फिर से आ गई ।इन्हें न तो संविधान की परवाह है ,ये संविधान को अपनी सुविधानुसार स्वयं के हित के लिए उपयोग कर रहें है।गरीब वंचित वर्ग बना रहे तथा पूंजीपति वर्ग बना रहे यही इनका उधेश्य है।अर्थात पूंजीपतियों ने लोकतंत्र पर कब्जा कर लिया है जिस प्रकार ब्रिटेन में जॉर्ज पंचम द्वितीय के मरणोपरांत वहाँ के कुछ पूंजीपतियों ने अपने प्रतिनिधियों को वहां की संसद में भेज कर लोकतंत्र स्थापित किया और दुनिया के 167 देशों पर राज करके उनका शोषण किया वही स्थिति इस देश मे भी देखने को मिल रही है ।जब तक मध्यम वर्ग एक जुट हो कर निम्न वर्ग को साथ ले सड़क पर उतर कर जन आंदोलन नही करेगा इस व्यवस्था से निजात नहीं मिल सकती ।
सोमवार, 24 मार्च 2025
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