मंगलवार, 22 दिसंबर 2020

PARLIMENTARY DEMOCRACY में पोलिटिकल पार्टीज की भूमिका

 किसी भी देश  में जहाँ पार्लियामेंट्री डेमोक्रेसी है वहां की राजनैतिक पार्टियों को VISIONARY होना चाहिए VISION भी देश के उत्थान का न की पार्टी के उत्थान का | यदि VISION को प्राप्त करने वाले कार्य धरातल पर दिखेंगे तो जनता में पार्टी के प्रति रुझान बढ़ेगा और ये रुझान वोट में तब्दील हो जायेगा |                                                                 भारत जैसे देश में जहाँ अनेक धर्म और सेंकडो जातियों का संगम हो और शिक्षा का स्तर निम्न हो , गरीबी भयंकर, हजारों साल की गुलामी की पीड़ा हो उस देश में तो पार्टियों को करने के लिए बहुत काम है |बस  VISION  होना चाहिए और VISIONARY   लोगों की तलाश करनी होगी ,भले ही वो किसी भी धर्म  जाति  का हो | उसमे सिर्फ योग्यता होनी चाहिए ,उसे विषय विशेष में पारंगत होना चाहिए | और जिस विषय में उसे पारंगता प्राप्त है उसी क्षेत्र में उसके ज्ञान का उपयोग  होना चाहिए | योग्य व्यक्तयों की इस देश में कमी नहीं है ,इसी देश के पारंगत लोग विश्व की BLUECHIP  कंपनियों के CEO ,MD  बनकर  उनको सबल बना सकते हैं तो इस देश को क्यों नहीं ?परन्तु व्यवहार में ऐसा हो नहीं रहा है | जातियों और धर्म के आधार पर जन प्रतिनिधियों का चुनाव होता है योग्यता SECONDARY होती है ,और प्रभावी, बाहुबली, धनबलियों को प्राथमिकता दी जाती है ,और इन्ही प्रतिनिधियों का चुनाव होता है और ये ही शासनाधीश बन जाते हैं |योग्यता और विषय की पारंगता गौण हो जाती है ,जिसने VISION जो उत्थान का था वो पूरा नहीं हो पता ,और विकास एकांगी बनकर  सीमित  हो जाता है | जिससे न तो देश विकसित हो पता है और न ही जनता खुशहाल |इन जाति  और धर्म के लोगों में कुशाग्र लोगों की कमी नहीं है पर इनको छांट कर राजनीती  में लाने  का प्रयास नहीं किया गया ,क्योंकि पार्टियों की प्राथमिकता येन केन प्रकारेण जीतने  वाले प्रतिनिधि की तलाश रहती है न  कि ज्ञान पारंगता की ,उसमे उद्देश्य सेवा न हो कर सत्ता सुख बन जाता है ,जो पार्लियामेंटरी डेमोक्रेसी के उद्देश्य के विपरीत है ऐसे में फिर से सामंती युग की और देश जा रहा है ,जिससे देश के विखंडन की सम्भावना बढ़ सकती है |